तानाशाह

तानाशाह :

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ज़ब ज़ब कोई डरता है 

तो वो सारे रस्ते बंद करता है 

ना कोई उसकी तरफ आए

ना कोई उसकी तरफ का जाए

जो शोर उठ रहा सड़कों से 

उनको दबाना उसकी कायरता है 

कब तक छुपा रहेगा भीड़ से 

कभी तो सामने आना ही होगा 

चलते हुए देश की चाल थाम 

रोक देना भी तो उसकी क्रूरता है 

कुर्सी का गुमान ठीक नहीं है 

साहेब, हर समय अपनी नहीं रहती 

ज़ब उतरोगे कभी, तब देखोगे

अंद्धविश्वास में कितनी अस्थिरता है

अमर तो नहीं है ना कोई यहाँ 

सबका हिसाब जीते जी ही होता है 

कर्मों के गणित में ईश्वर देखेगा 

तुम्हारे मिजाज़ में कितनी निष्ठुरता है 

ज़ब ज़ब कोई डरता है 

तो वो सारे रस्ते बंद करता है


~ जया सिंह ~


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