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शहर से दूर कहीं और

  शहर से दूर कहीं और :  •••••••••••••••••••••• शहर से दूर कहीं और...एक ऐसी जगह जहां शोर शराबा ना हो। ठंडी बहती हवाएं हों, हौले हौले बहता हुआ नीला सा पानी हो, चमकते हुए पहाड़ हों, और भरपूर हरियाली हो। क्या हम सब की चाहतों में एक ऐसी ही जगह बसने की दीवानगी नहीं होती....माना कि शहरों में सुख सुविधाओं का रेला लगा रहता है। पर क्या इस सुकूँ का मुकाबला वो तमाम सुख सुविधाएं कर सकती है ? ? यहां तो कमियाँ भी कहीं जिंदगी को भरपूर बनाती हुई मिलेंगी।  हे परवरदिगार इस जनम में तो तूने जैसे पैदा किया जहां पैदा किया। हम जी लिए। पर याद रखियो। अगले जनम में किसी ऐसी ही पुरसुकून जगह पर जनम देना। जहां हम भीड़ और उलझनों से दूर हों और जैसी प्रकृति तूने बनाई है उसे उसी रूप में अपने करीब पाएं।   सीख लेंगे हम भी थोड़ी कमियों में जीना जो इन पुरसुकून वादियों में अपना बसेरा  बनाकर भूल जाएं फ़िक्रों की उधड़न सीना अपनी ज़िन्दगी में और चाहिए तो क्या बस ताज़गी की खुराक और बहता नीर पीना भीड़ से दूर कहीं जंगल में रहें तो जानें  पेड़ों की  सरसराहट में मीठी सी खुशबू का असर है भीना चलो बस जाएं ...

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