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दस्तखत

दस्तख़त : •••••••••• कोई तो ज़रूर ही ज़बान से मुकरा होगा                              तभी तो दस्तख़त का चलन आया...                                  पक्का वादा जो ज़बानी कर न पाए तभी                            भगवद्गीता पर कसम का वचन आया...                                       किसी ने तो कुचला होगा किसी का मन                              तभी बुझी आँखों से अश्रु रुदन आया...                            रिश्तों को गर संभाल लेते जो दर्द समझकर                        तो फ़िर...

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