नियमों की घोर अनियमिततायें
नियमों की घोर अनियमितताएं : •••••••••••••••••••••••••• मुझे याद है कि जब मैं छोटी थी। तब हमारे घर अक्सर ट्रांसजेंडर आया करते थे। मेरी नानी उनकी ढंग से आवभगत करके उनको प्रेम से बहुत कुछ ले देकर संतुष्ट करती थी। मेरी नानी का कहना था कि ये लोग अंदर से आहत होते हैं। उनको अपनी कमी का अहसास होता है इसलिए वो औरों की खुशी में खुद को खुश रखते हैं। दूसरों के घरों के मौकों को भरपूर बनाने के लिए नाच गाने के जरिये आशीर्वाद की परंपरा बनाई गई हैं। इसलिए व्यवहारिक कोशिश ये होनी चाहिए कि उनकी असंतुष्टि से बचे और उनकी दी गई दुआओं की ताकत को स्वीकार करें। परंतु ज़बरदस्ती पकड़कर, बल्कि दबोचकर विकास करने की जो परम्परा सत्ताएं निर्धारित कर रही वो बिल्कुल गलत है। और अब निशाना बनाया गया हैं उसी ट्रांसजेंडर समुदाय को... अक्सर हुकूमतों के हाथ में मनमानी और विनाश की इतनी मोटी लकीर होती है कि किसी का भला हो ही नही सकता । जिसके लिए कानून बनाते हैं , उसी को सबसे पहले अनदेखा करते हैं। सबसे पहले किसी समुदाय को निशाने पर लिया जाता है फिर न उसकी सुनी जाती हैं, न उन पर कोई रिसर्च किया जाएगा, बस खीं...











