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अपना भी ख़्याल रखो

  अपना भी ख़्याल रखो :                         •••••••••••••••••••••••• कुछ तो ख्याल अपना भी रखा करो यार  हमेशा दूसरों की फ़िक्र में क्यों जलते हो  सब को अपनी-अपनी पड़ी है इस ज़माने में  तुम ही हो जो औरों के अनुरूप पलते हो  अपनी ख्वाहिशों की तमन्नाओं को उजाले दो  क़ि वो रोशन हो अपनी राह ढूंढ़कर आगे बढ़े उनका अपना एक उजियारा वायु मंडल हो जहाँ वो नीले व्योम में मेघ बनकर ढलते हो  जिनसे बरसी हरेक बूँद एक नई ऊर्जा के साथ  आएं और पलों में ताज़गी व उत्साह भर जाए  जिनको हांसिल करने को तन-मन,उम्रदराज  होने पर भी नन्हें बच्चोँ की तरह मचलते हो  ज़रूरी तो नहीं कि एक उम्र होने पर उम्मीदें  स्थिर होकर.... एक मुकाम पर रुक जाएं ख़ुद को जिंदादिल बनाये रखने के लिए वो  आकांक्षाएं रखनी है जिनसे हौसले उछलते हैँ  कुछ तो ख्याल अपना भी रखा करो यार  हमेशा दूसरों की फ़िक्र में क्यों जलते हो...!               ~ जया सिंह ~ ::::::::::::::::::::::::::::::...

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