मज़बूत होने के साथ मजबूर होना
मज़बूत होने के साथ मजबूर होना : ••••••••••••••••••••••••••••••• बहुत ही मुश्किल होता है,...एक ही समय में मज़बूत होने के साथ मजबूर होना... उस पीड़ा से दो चार होना जिसमें चाहकर भी रहना पड़े अपनी खुशियों से दूर होना... मज़बूती इसलिए दिखानी पड़े कि दूसरे सभी हमें कभी कमजोर ना समझ सकें.... बाहर से मुस्कुराते रहेंगे, जबकि दिल देख रहा अंदर से टुकड़े टुकड़े होकर चूर होना.... परिस्थितियों से मजबूर होकर चुप रह जाते हैँ अपने होठों को सी कर रखते हैँ.... आँखें ज़ब बरसना चाहें तो ऐसे मौके बनाते हैँ जैसे घर में उत्सवों का भरपूर होना.... संभाल के ख़ुद को इकठ्ठा रखने कि कोशिश करते हैँ कि बिखरकर खो ना जाए कहीं.... दर्द कि इंतेहा इतनी रहती है कि अक्सर ख़ुद को ही ग़लत समझ मान लेते हैँ अपना कसूर होना... बड़ा ही मुश्किल होता है......एक ही समय में मज़बूत होने के साथ मजबूर होना...!! ~ जया सिंह ~ •••••••••••••••••••••••••••••••••••...






