प्रेम, अहसास भरी एक जिम्मेदारी
प्रेम, अहसास भरी एक जिम्मेदारी : ••••••••••••••••••••••••••••• कभी-कभी हम किसी इंसान को इसलिए नहीं खोते कि प्यार कम हो गया था... हम उसे इसलिए खो देते हैं क्योंकि प्यार करते-करते हम उससे बहुत कुछ माँगने लगते हैं। उसका समय, उसका ध्यान, उसकी हर बात का जवाब, हर खामोशी का मतलब। और धीरे-धीरे वह इंसान हमें प्यार से ज्यादा एक जिम्मेदारी समझने लगता है। शायद हमें किसी को पाने से ज्यादा, उसे समझना सीखना चाहिए। यह समझना कि हर बार उसका मुस्कुराना खुश होने की निशानी नहीं है और हर बार उसका चुप रहना नाराज़गी नहीं। कुछ लोग टूटते हुए भी कहते हैं, “मैं ठीक हूँ।” सिर्फ इसलिए क्योंकि वे किसी अपने को अपनी परेशानी देकर परेशान नहीं करना चाहते। कितना अजीब है ना... हम जिससे सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं, उसी के सामने अपने डर को सबसे ज्यादा दिखाते हैं। उसके देर से जवाब देने में दूरी ढूँढ़ लेते हैं, उसके बदले हुए लहजे में किसी और का आ जाना, और उसकी थोड़ी-सी खामोशी में अपने लिए हजार सवाल। जबकि कभी-कभी सामने वाला बस थका होता है। कभी वह खुद से लड़ रहा होता है। कभी उसके भीतर इतनी आवाज़ें होती हैं कि वह तुम्हें जवाब देने...







