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स्याही की फ़ितरत

  स्याही की फ़ितरत  ••••••••••••••••••• आवाज़ उठाती, संघर्ष करती  बेटियों से दुनिया क्यों इतना डरती है  कि उनकी अविचल उड़ान को  रोकने को तमाम बाधायें ख़डी करती है  जितनी भी दीवारें खड़ी करो रस्ते रोको  हर रुकावट को पार करके उनका  हौसला और ज़्यादा ऊँचा हो जाएगा गिराने की हर कोशिशों के बाद भी वो अपने अंदर चौगुना हौसला भरती है  कहाँ तक तुम उनके पंख बाँधोगे... वो आसमान का ही अर्थ बदल देंगी तुम काट दो उनकी ज़मीं का हरेक हिस्सा  उनके पास मौजूद उनकी अपनी धरती है शक्लें बिगाड़ने के मंसूबे के लिए जो  तुमने स्याही को चुना है तो मान लो  कुछ मिटाने के लिए स्याही नहीं बल्कि  इतिहास लिखने को स्याही की ज़रूरत पड़ती है  काला अक्षर भैंस बराबर मानने वालों  इबारतों का रंग अक्सर काला ही होता है  पर उनमें छिपे हुए ज्ञान की फ़ितरत  विध्वन्सी नहीं बल्कि ईमारती है....। *************************************

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