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कपड़े और नज़रिया

कपड़े और नज़रिया : ••••••••••••••••••••• क्या कपड़े आधुनिकता का पैमाना हैं ? इसके जवाब अलग-अलग हो सकते हैं। साफ कहा जाए तो “आधुनिकता” लफ्ज़ भी कम कन्फ्यूजिंग नहीं है। ये समझ नहीं आता कि किसे आधुनिक कहा जाए, किसे नहीं । आम तौर पर पिछली एक-दो सदियों में मंज़रेआम पर आई चीजों को आधुनिक कह दिया जाता है, लेकिन अब तो आधुनिकता के भी कई हिस्से और परिभाषाएँ बना दी गई हैं। उन डिटेल्स में जाएंगे तो और उलझ जाएंगे।  लेकिन धोती-कुर्ता, कुर्ता-पजामा, पजामा-शेरवानी, मुस्लिम औरत का हिजाब, हिन्दू औरत का घूंघट — इन्हें पुरातन माना जाता है। वहीं जीन्स-टॉप या दूसरे छोटे कपड़े, पुरुषों की फटी या चकती लगी पैंट — इन्हें आधुनिक कहा जाता है। कपड़ों की बुनियाद पर जब सोचा जाएं तो इन्हें दो sections में रखना पड़ता है। पहला समूह उन कपड़ों का है जो जिस्म के उन हिस्सों की नुमाइश करते हैं जो विपरीत लिंगी में सेक्सुअल ख्वाहिश या, अंग्रेज़ी में कहें तो, टेम्पटेशन पैदा करते हैं। दूसरा समूह उन कपड़ों का है जो इन्हीं हिस्सों को एक हद तक ढक देते हैं — यानी लालच, पाने की ख्वाहिश या टेम्पटेशन के हालात ही पैदा नहीं होने देते। अब यहाँ...

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