स्त्रीविरोधी फ़ैसलों की नज़ीर
स्त्रीविरोधी फैसलों की नज़ीर : •••••••••••••••••••••••••••• आज का समय दुनिया में एक अलग नज़ीर बना रहा है । जिसमें तर्कविहीन समझ, मूर्खता और नफ़रत इस दौर की हासिल है। आश्चर्य इस बात का है कि ये नजीरें आम समाज की तरफ से नहीं बल्कि न्यायालयों की तरफ से आ रही। जिन्हें न्याय के लिए देखा जाता है...क्या न्याय के उच्च पदों पर आसीन लोग पारिवारिक नहीं होते ? क्या उन्हें संबंधों के सही गलत का भान नहीं होता ? क्या उनकी तरफ न्याय की आस से देखते लोगों की पीड़ा का अहसास कुर्सी छीन लेती है ? ऐसे बहुत से सवाल आ सामने है। समाज जिस तर्क को अवांछनीय मानता है उसे अगर अदालत सही ठहराये तो आम इंसान कहाँ जाए.....और ख़ासकर महिलाओं के प्रति तो यह फैसले ही उन पर हो रहे बलात्कार से कम नहीं लगते !! क्योंकि आज के दौर में इस घृणित अपराध के प्रति कानून की गंभीरता में बेहद कमी आई है. कुछ फैसलें जो भारतीय न्यायालयों ने स्त्री पुरुष के संबंधों पर दिए। जिनको जानने के बाद सिर्फ दुख ही होता है कि कोई स्त्री या पुरुष जो न्याय व्यवस्था की उच्च पद पर बैठा हो उसकी आत्मा ऐसे कैसे मर जाती हैं। ऐसे ही कुछ फैसल...












