एक पिता की वेदना
एक पिता की वेदना :
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डेढ़ दो साल से पूरी दुनिया की हलचल छोड़ जो बच्चा सिर्फ किताबों में घुसा हुआ था। जिसका भी बहुत बार मन किया होगा थोड़ा घूम कर आऊं। एक आध सिनेमा ही देख लूं। या तो कोई फक्शन ही अटेंड कर लूं। चेंज हो जाएगा। पर हर बार उसने अपने मन को मारा। साथ ही उसके माँ बाप ने भी बहुत कुछ ऐसा छोड़ा जिसके होने से उनके बच्चे की पढ़ाई की निरंतरता बिगड़ेगी। वही नीट प्रवेश परीक्षा आसानी से लीक करवा दी जाती है।
ऐसे ही एक पिता का दर्द...कुछ पंक्तियों के मध्यसम से
मेरे बच्चे का एक साल दे दो सरकार जी -
और इसमें..............यह-यह चीज़ें शामिल हैं !
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इसकी मम्मी का घुटने का ओपरेशन था
लेकिन कोचिंग की फीस डेढ़ लाख थी
हमने नहीं करवाया कि ऑपरेशन अगले साल करवाएंगे
लंगड़ा कर चलती रही वह
कि बच्चा तो डॉक्टर बन जाएगा......
इसकी मम्मी के घुटने दे दो सरकार जी !
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इसका बाप यानी कि मैं ट्रांसफर चाहता था
पोस्टिंग दूर थी जहां कोचिंग की सुविधा नहीं थी
इसलिए मम्मी और यह बच्चा अकेला रहते थे
मेरे घर आने से डिस्टर्ब होगा बच्चा , इसलिए ट्रान्सफर को टाला
अकेले रहकर और बाहर का खाना खाकर
मेरे पेट में अलसर हो गया है।
मेरी ऐंडोस्कॉपी करवा दो सरकार जी !
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इसका दादा इसलिए ज़िंदा है अब तक
कि यह एक दिन डॉक्टर बनकर घर आएगा
इसका दादा दो दिन से पागलों की तरह व्यवहार कर रहा है -
इसके पागल हो चुके दादा को ठीक कर दो सरकार जी !
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इसकी दादी ने बालाजी की सवामणि बोली थी
लेकिन अब मंदिर बंद करके बैठी है
जब तक न्याय नहीं मिलेगा बाहर नहीं आऊंगी।
तुलसी-दल पर ज़िंदा है इसकी दादी
इसकी दादी की भूख हड़ताल तुड़वा दो सरकार जी!
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यह जो कोचिंग है
जिसमें मेरे बच्चे ने मज़दूर की तरह पढ़ाई की
आँखें सूज गईं
कूबड़ निकल आई
घुटने जाम हो गए सत्रह की उम्र में
रिश्तेदारों से मिला नहीं दो साल हुए
होली और दीवाली घर नहीं आया
मेरे बच्चे को एबनार्मल से नॉर्मल कर दो सरकार जी !
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सरकार जी!
मैं नहीं जानता सीबीआई को
मैं नहीं जानता कोर्ट कचहरी पुलिस को
मैं जानता वे कौन दलाल थे
मेरे बेटे ने हालांकि मुझसे कहा था कि पांच लाख लगेंगे पापा
अपन चाहें तो कुछ जुगाड़ हो सकता है
लेकिन मैंने उसे ईमानदारी पर भाषण दिया था
मेरे बच्चे का ईमानदारी पर भरोसा लौटा दो सरकार जी !
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सरकार जी!
बच्चे हैं यह सब बच्चे
दुख की बात है कि बड़े हो रहे हैं बच्चे
इन्हें रोकिये चोर उचक्के बनने से
एक दिन आएगा जब यह किसी की नहीं सुनेंगे
कमीने बन जाएंगे सब के सब
इन्हें कमीने बनने से रोकिये सरकार जी!
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सरकार जी!
फांसी के फंदे
फिनायल की बोतल
धारदार ब्लेड
दौड़ती हुई रेल
मकान की तीसरी मंज़िल
मुझे दो दिनों से बड़े बुरे सपने आ रहे हैं -
मेरे अच्छे सपने लौटा दीजिये सरकार जी !
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सरकार जी!
कौन है आपका शिक्षा मंत्री
मुझे उसकी कॉलर पकड़नी है
कौन देता है कोचिंग वालों को ज़मीन
मुझे उसके थप्पड़ जड़ना है
किसने खोले हैं यह एयर कंडीशन्ड कबूतरखाने
मुझे इनमें भूकम्प की तरह उतरना है
मेरे बच्चे ने दो दिन से खाना नहीं खाया है
मॉडल पेपर देखता है तो उल्टी करने लगता है
डॉक्टर को दिखाया तो वो स्ट्रेस बता रहा
मैं नहीं चाहता कि इतनी सी उम्र में यह नींद की गोली लेवे
मेरे बच्चे की नींद लौटा दो सरकार जी !
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सरकार जी!
मरने नहीं दूंगा अपने बच्चे को
बी. ए., बी. एस. सी., बी. एड. कुछ तो कर ही लेगा
या फ़िर मास्टर बन जाएगा
कमा के तो फिर भी खा ही लेगा
लेकिन सरकार जी!
ये पक्का है कि वो एक हारा हुआ व्यक्तित्व बन जाएगा
दूसरों का खून चूसने वाला मच्छर बन जाएगा
तो ऐसा करें कि हवा में जहर फैला दें
सबके सब मच्छरों की मार दीजिए।
कोई आपकी अवाम को परेशान करे उसका इलाज कीजिए
मार दीजिये ताकि आगे कोई सवाल ही ना रहे
कहिए ना सरकार जी मारेंगे न ?
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