बक्श दो, रहम करो
बक्श दो रहम करो...!
•••••••••••••••••••••
पाकिस्तान के एक इलाके से इस घटना का जिक्र मिला कि महज अट्ठारह महीने कि मासूम आइजेल का 3 नाबालिग लड़कों ने कब्रिस्तान में ले जाकर बलात्कार किया। और पीड़ा से वो मर गई।
बच्ची ज़ब मात्र 16 दिन की थी तभी उस की माँ को उसके पति ने उसे छोड़ दिया था। वो अकेले रहकर किसी तरह बच्ची को पाल रही थी। माँ की सारी दुनिया थी वो मासूम परी। एक दिन वो माँ बच्ची को उसकी खाला के पास छोड़कर कुछ सामान लेने बाहर गई। पीछे से उस बच्ची का दूर रिश्तेदारी का 17 साल का भाई आया और बच्ची कोनकुछ चीज़ दिलाने के नाम पर ले गया। खाला परिचित थी इसलिये उसने ले जाने दिया। वो उस बच्ची को लेकर पास के कब्रिस्तान पहुंचा जहाँ उसी जे हम उम्र दो लड़के और थे। तीनों ने मिलकर उस मासूम को नोचा खसोटा। यहाँ तक की उसका निचला हिस्सा पूरा फाड़ कर रख दिया। फ़िर बच्ची को थोड़ा व्यवस्थित करके वापस घर छोड़ गए। बच्ची की हालत ठीक ना देखकर उसकी माँ उसे नज़दीक के अस्पताल ले गई। जहाँ बच्ची का डायपर खोलने के बाद असलियत का पता चला। वो डायपर पूरा का पूरा खून से सना हुआ था ।
अब इस घटना के पीछे का मज़मून समझिये। छोटे छोटे बच्चे आख़िर बलात्कार जैसा कुछ सोच कैसे लेते हैँ। इसके पीछे hard porn नहीं बल्कि soft porn है। जो की अश्लील गानों,उनके शब्दों और फिल्मों की भाव भंगीमाओं में दिखाया जाता है। एक्चुअल पोर्न हर किसी की पहुँच में नहीं है। उस पर सरकार निगाह भी रखती है। पर ये जो अधनंगे गाने हैँ, फिल्मों के सीन हैँ, रील्स के जरिये उटपटांग मसाला है वो तो हर बच्चे की पहुँच में है। Soft पोर्न को हमारे समाज ने कभी seriously नहीं लिया। पर मन और मस्तिष्क खराब करने में ये ज़्यादा कारगर है। Hard porn तो आकस्मिक उत्तेजना पैदा करता है। पर ये soft porn मन में धीरे धीरे बैठता है। और पक्का होता जाता है। ये बस मौका ढूंढता है कि कहीं से कोई जरिया मिले जो वह अपनी हवस पूरी कर सके। ऐसे में उसे उम्र या अन्य कोई reason इस में बाधा नहीं बनता।
आधुनिकीकरण ने अगर बहुत कुछ दिया है तो बहुत कुछ छीन भी लिया है। जो हांसिल हुआ उसका लाभ तो सभी ले रहे हैँ। पर सबसे बड़ा नुकसान है कि बच्चोँ से उनका बचपना छीन लिया। अब बच्चे बहुत जल्दी बड़ों कि तरह बन रहे हैँ। दूसरे हर हाथ में मोबाइल से सुविधा कम बर्बादी ज़्यादा दिख रही है। इंटरनेट कि पहुँच दुनिया कि हर चीज़ से परिचय करवा रही वह भी जो जानना जरूरी नहीं।
आइजेल नहीं जानती थी कि उसकी मासूमियत भी इसलिए घृणित काम को होने से रोक नहीं सकती। उसका दोष बस इतना था कि वो स्त्री अंगों के साथ पैदा हुई थी। और वो अंग किसी पुरुष के अंदर दबी हुई हवस को पूरा करने का जरिया बन रहे थे। शर्म है ऐसे समाज पर जो तत्काल रूप से इस कुकृत्य के लिए उन लड़कों को मौत नहीं दे रहा... अभी भी इस पर चर्चा विमर्श हो रहा।
*****************************************
Comments
Post a Comment