धैर्य की कीमत
धैर्य की कीमत :
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चलिए आज एक व्यवहारिक पहलू पर थोड़ा ध्यान देते हैं। लेकिन उसके बारे में बात करने से पहले एक उदाहरण से उसकी गहराई समझते हैं।
जब हम GPS पर कोई location enter करते हैं। तो वो हमें पूरे रास्ते guide करती है। अगर कोई गलत turn ले लिया तो वो बहुत ही शांति से हमें अगला सुझाव देती हैं कि कोई बात नहीं। यहां से मुड़ जाओ तो destination पर पहुंच जाओगे। ऐसा अगर कई बार भी होए तो भी वो बिना गुस्सा हुए , बिना चिल्लाए हमें उस destination पर पहुंचाने के लिए प्रयासरत रहती है। हमारी हर बार की गलतियों को नजरअंदाज करके भी उसे बस हमारे goal का ध्यान रहता है।
क्या यही नजरिया हम अपनी जिंदगी के लिए नहीं अपना सकते हैं। इसके लिए जो सबसे जरूरी चीज है वो है धैर्य.... और शायद वो ही अब हम किसी में ना के बराबर रहा है। गलतियां होती है, मनमाफ़िक हर चीज़ नहीं होती, सामने वाला हमारे हिसाब से नहीं ढल सकता ऐसे में हम उतावले होकर क्यों वह चाहने लगते हैं जो होने में समय लगे या हो सकता है कि उसका होना असंभव है।
जिंदगी हर बार बस प्लस प्लस नहीं देती। क्योंकि समीकरण तो तभी बैठेगा जब गुणा भाग जोड़ घटाना सब में एक समुचित बैलेंस में होए। कभी कभी उतावलेपन के बजाए धैर्य बेहतरीन परिणाम दे जाता है। बस थोड़ी शांति से उसकी स्थिति पर गौर करना है। अगर ये लगे कि धैर्य और इन्तेजार के बाद भी goal मिलना असंभव है तब खुद प्रयास करके कुछ अतिरिक्त करना चाहिए।
भावावेश में आकर कुछ अन्यथा करने से बेहतर है कि थोड़ा शांति से काम लिया जाए। क्रोध अक्सर होती हुई चीज़ों को भी बिगाड़ सकता है। क्योंकि उस समय मस्तिष्क सही काम नहीं कर रहा होता है। जिंदगी वैसी ही चले जायदा हम चाहते हैँ तो फ़िर जीने का रस ही खत्म हों जायेगा। स्वाद में नमक मीठा कड़वा तीखा सभी होना जरूरी है। इसलिये धैर्य रखें और जिन्दगी की अच्छाई बुराई दोनों को स्वीकार करें।
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