दो मसले
दो मसले : ••••••••••••
बस यही दो मसले जीवन भर परेशान करते रहे
ना तो नींद पूरी हुई ना ही ख़्वाब....
वक़्त समझाता रहा, थोड़ा और सब्र किया होता
और हम सब्र से मांगते रहे हिसाब ...
शिकायतें क्या करें तुझसे ए जिन्दगी हम अब
बहुतों को तो ये भी न मिला जनाब ...
प्यास लगी थी गज़ब की पर पानी में जहर था
पीते तो मर जाते न पिए भी प्यासे मर रहे
दोनों ही सुरतें नाबर्दाश्त काबिल थी फ़िर भी जिए
क्योंकि गुजर जाता ही है हर सैलाब...!
~ जया सिंह ~
***********************************
Comments
Post a Comment