ख़ुद से प्यार हो गया
जबसे हमको खुद से प्यार हो गया है
उम्र के ठहराव का आसार हो गया है
अब जिंदगी खूबसूरत लगने लगी है
हर लम्हा जैसे खुशगवार हो गया है
मौके बनाने और चुराने लगे हम अब
अपनी खुशियों के समान के वास्ते
अकेले निकलते हैं साथ की चाह नहीं
अब मजबूत रहने का जुनू सवार हो गया है
तन की खूबसूरती उम्र की मोहताज नहीं
अब भी हम में कुछ तो बात है ही ज़रूर
सुंदरता महसूस करने लगे है हम जब से
मन को भी सुंदर रखने का करार हो गया
कितने ही रंग बिखरे हुए हैं हमारे पलो में
जब असल जीना शुरू किया तब जाके जाना
अब ज़िन्दगी में भरपूर जीने की उम्मीद का
हौसला अपने अंदर बेशुमार हो गया है..!
~ जया सिंह ~
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