जीवन की सीख

जीवन की सीख : 

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ये दो मज़ेदार छोटी कहानियाँ जिनका अर्थ बहुत गहरा है। जो जिंदगी का बहुत अच्छा सबक देती हैं। और जिसको महसूस लेने से धैर्य और समझ की महत्ता पता चलती है। उतावलापन और बेसब्री हर परिस्थिति में सकारात्मक परिणाम नहीं देते। थोड़ा सुकूँ और प्रतीक्षा से बिना प्रयास के भी अपने लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। 

1. "गहरा अर्थ"

एक छोटे बच्चे को ठंड में आइसक्रीम खाते देखा। तो चिंता के कारण एक व्यक्ति ने यूँ ही कहा, "इतनी ठंड में आइसक्रीम , खाओगे तो बीमार हो जाओगे!"

बच्चे ने जवाब दिया, "मेरी दादी 103 साल तक जिंदा रहीं।"

मैंने पूछा, "क्या वो भी आइसक्रीम खाती थीं ?"

बच्चे ने कहा, "नहीं, बल्कि इसलिए कि वो दूसरों के मामलों में दखल नहीं देती थीं...।

कितना गहरा सबक! उस व्यक्ति को समझ आया कि बिना वजह दूसरों के मामलात में दखलअंदाजी अच्छी नहीं है। ये चिंता करने की निशानी हैं। और हर किसी को अपने हिस्से की स्थितियों को खुद ही  संभालना पड़ता है। 


2. "संयम रखना"

एक युवती ट्रेन में चढ़ी और देखा कि उसकी सीट पर एक आदमी बैठा हुआ है। उसने विनम्रता से टिकट देखा और कहा, "सर, मुझे लगता है कि आप मेरी सीट पर बैठे हैं।"

आदमी ने गुस्से में अपना टिकट निकाला और चिल्लाया, "ध्यान से देखो! यह मेरी सीट है! तुम अंधी हो क्या?!"

लड़की ने चुपचाप उसका टिकट ध्यान से देखा और बहस करना बंद कर दिया। वह शांति से उसके बगल में खड़ी हो गई।

ट्रेन चलने के कुछ मिनट बाद लड़की ने हल्की आवाज़ में कहा, "सर, आप गलत सीट पर नहीं बैठे हैं, लेकिन गलत ट्रेन में बैठे हैं। यह ट्रेन कोलकाता जा रही है, और आपकी टिकट मुंबई की है।"

कुछ संयम ऐसा होता है जो लोगों को उनके व्यवहार पर पछताने पर मजबूर कर देता है। अगर चिल्लाने से सब कुछ हल हो जाता, तो शायद आहिस्ता बोलने और शांति से समझाने की बात ही नहीं होती। 

ये दोनों घटनाएं जीवन को समझाती है। जीवन में व्यवहार को बेहतर रखने के लिए बस छोटे छोटे प्रयास ही काफी होते हैं।

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