स्त्रीविरोधी फ़ैसलों की नज़ीर
स्त्रीविरोधी फैसलों की नज़ीर :
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आज का समय दुनिया में एक अलग नज़ीर बना रहा है । जिसमें तर्कविहीन समझ, मूर्खता और नफ़रत इस दौर की हासिल है। आश्चर्य इस बात का है कि ये नजीरें आम समाज की तरफ से नहीं बल्कि न्यायालयों की तरफ से आ रही। जिन्हें न्याय के लिए देखा जाता है...क्या न्याय के उच्च पदों पर आसीन लोग पारिवारिक नहीं होते ? क्या उन्हें संबंधों के सही गलत का भान नहीं होता ? क्या उनकी तरफ न्याय की आस से देखते लोगों की पीड़ा का अहसास कुर्सी छीन लेती है ? ऐसे बहुत से सवाल आ सामने है। समाज जिस तर्क को अवांछनीय मानता है उसे अगर अदालत सही ठहराये तो आम इंसान कहाँ जाए.....और ख़ासकर महिलाओं के प्रति तो यह फैसले ही उन पर हो रहे बलात्कार से कम नहीं लगते !! क्योंकि आज के दौर में इस घृणित अपराध के प्रति कानून की गंभीरता में बेहद कमी आई है.
कुछ फैसलें जो भारतीय न्यायालयों ने स्त्री पुरुष के संबंधों पर दिए। जिनको जानने के बाद सिर्फ दुख ही होता है कि कोई स्त्री या पुरुष जो न्याय व्यवस्था की उच्च पद पर बैठा हो उसकी आत्मा ऐसे कैसे मर जाती हैं। ऐसे ही कुछ फैसलों पर नज़र डालते हुए अपनी अंतरात्मा को न्याय करने का मौका ज़रूर देना चाहिए।
❓❓.....निर्वस्त्र किए बगैर नाबालिग को छूना यौन उत्पीड़न नहीं-----बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ से आया न्याय
❓❓....महिला के निजी अंग पकड़ना और नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म की कोशिश नहीं-----इलाहाबाद हाई कोर्ट की तरफ से मिला न्याय
❓❓....लड़की के स्तन पकड़ना, उसके कपड़े ढीले करना, उसे जबरन भींचना, पायजामे का नाड़ा खोलना रेप की कोशिश नहीं बल्कि सिर्फ preparation है -----जस्टिस राम मनोहर मिश्र,इलाहाबाद हाईकोर्ट।
❓❓.... योनि के ऊपर लिंग रखकर वीर्यपात करना बलात्कार नहीं"----छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास.
❓❓....'बिना पेनिट्रेशन के प्राइवेट पार्ट को रगड़ना रेप की कोशिश है,रेप नहीं'-----------छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट.
❓❓....मनुस्मृति जैसे ग्रंथ महिलाओं सम्मान देते हैं-------दिल्ली हाईकोर्ट
❓❓-----एक फैसला ये भी आया कि यदि कोई महिला लंबे समय तक किसी पुरुष के साथ बिना विवाह के रहती हो तो ये शादी का झांसा नहीं बल्कि आपसी सहमति मानी जायेगी।
❓❓-----कपड़ें भड़काऊ पहने थे इसलिए सामने वाला उकसा और उसने कुछ गलत आचरण किया-----उच्च न्यायालय
❓❓------रोहतक के एक केस में महिला सफाई कर्मचारियों को माहवारी के दिनों में छुट्टी मांगने पर अपना सैनिटरी पैड दिखा कर छुट्टी मांगने के लिए विवश किया गया। ये निजता का उल्लंघन है जिसे अनदेखा किया गया
❓❓-------सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में एक फैसले में बलात्कार के केस में समय सीमा का सख्ती से पालन करने के आदेश पारित किया। यह उन पीड़ितों के लिए अन्यायपूर्ण था जो कैदी शर्म दबाव या तकलीफ़ के चलते समय रहते शिकायत नहीं दर्ज करा पाती।
ये तो चुनिंदा फ़ैसले हैं जिनका ज़िक्र किया गया। ऐसे और बहुत से होंगे जिसमें हर बार एक औरत ही नंगी हुई होगी। क्योंकि पुरुष तो इन मामलों में खुद को सही साबित कर ही लेता है।
'आंशिक Cpd'
Pic courtesy - Pinterest
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