जल जीवन ही नहीं भावनाओं का संग्रहण है

जल जीवन ही नहीं भावनाओं का संग्रहण है :

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क्या आपने कभी ये महसूस किया कि पानी हमको 'सुन' रहा होता है? दुनिया का सबसे बड़ा डेटा स्टोरेज डिवाइस कोई 'Hard Drive' नहीं, बल्कि आपके सामने रखा गिलास में पानी है!

यह सिर्फ प्यास ही नहीं बुझाता, यह हर भावना और शब्द को 'रिकॉर्ड' करता है।

अजीब लग रहा है ?.... चलिए इसकी गहराई समझते हैं !

व्यज्ञानिक आधार: 

नोबेल पुरस्कार विजेता Luc Montagnier और Jacques Benveniste ने साबित किया है कि पानी में 'Memory' होती है।

पानी के अणु (Molecules) एक खास 'Quantum Pattern' बनाते हैं। पानी से पदार्थ निकाल भी लें, तो भी उसकी 'छाप' (Information) उसमें सुरक्षित रहती है। 

वैदिक आधार :

हजारों साल पहले हमारे ऋषियों को यह रहस्य पता था। तभी तो 'आचमन' और मंत्रों से जल को 'अभिमंत्रित' करने की परंपरा बनी। 

वेदों के अनुसार जल 'चेतन' है। जब आप हाथ में जल लेकर संकल्प लेते हैं, तो आप असल में उसके मॉलिक्युलर स्ट्रक्चर को 'प्रोग्राम' कर रहे होते हैं। 

तरीका : 

डॉ. इमोटो के प्रयोगों ने दिखाया कि 'कृतज्ञता' (Gratitude) के शब्दों से पानी के क्रिस्टल्स सुंदर हीरे जैसे बन जाते हैं, जबकि 'नफरत' से वे बिखर जाते हैं।

याद रखिए, आपका शरीर 70% पानी है। आप जो सोचते और बोलते हैं, उसका सीधा असर आपके सेल्स के पानी पर होता है। 

अभिसरण या संमिलन  :

आज का 'Scientific Era' उसी को सिद्ध कर रहा है जो हमारे पुराणों में पहले से दर्ज था।

हमारा विजन भी यही है- पानी को उसकी प्राकृतिक ऊर्जा और सही मॉलिक्युलर पैटर्न में वापस लाना। तकनीक और 'Vedic' समझ के मेल से। 

निष्कर्ष : 

अगली बार पानी पीने से पहले उसे एक सकारात्मक 'Affirmation' दें।  यह कोई अंधविश्वास नहीं, 'Quantum Biology' है।

पानी जीवित है, उसे सम्मान दें, वह आपको स्वास्थ्य देगा।

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