जिंदा आदमी
जिंदा आदमी : ••••••••••••••
अगर आप सचमुच जिंदा हैं,
तो अपने सामने पड़ी गंदगी को
कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते!
आप उसे देखते ही
या तो स्वयं साफ करेंगे,
या किसी से साफ करवाएँगे।
गंदगी केवल सड़कों पर नहीं होती,
वह विचारों में भी होती है,
व्यवहार में भी,
व्यवस्था में भी,
समाज में भी
और कभी-कभी हमारे अपने भीतर भी।
जिंदा आदमी वह नहीं
जिसकी साँसें चल रही हों,
जिंदा वह है
जिसके भीतर गलत को देखकर
बेचैनी पैदा होती हो।
जो अन्याय देखकर चुप न रहे,
भेदभाव देखकर आवाज़ उठाए,
किसी की पीड़ा देखकर
आँखें न फेर ले।
क्योंकि जिस दिन
गंदगी दिखाई दे
और मन में कोई हलचल न हो,
समझ लेना,
साँसें तो चल रही हैं,
लेकिन इंसान के भीतर का इंसान
धीरे-धीरे मर रहा है...🙏
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