सत्ता के मदमस्त वहशी समर्थक
सत्ता के मदमस्त वहशी समर्थक: ••••••••••••••••••••••••••••••••
इस समय हिंदुस्तान बहुत ही दयनीय स्थिति में पहुँच चुका है। जहाँ सत्ता में तानाशाही और जनता में अंधभक्ति चरम पर है।
"ज़ब नाश मनुज पर छाता है, तो पहले विवेक मर जाता है"
बस यही सब कुछ आज हो रहा। जो लोग ग़लत होते हुए देख कर भी उसे ग़लत नहीं बोल रहे क्योंकि सत्ता पर बैठे लोग उनके पसंदीदा हैँ। वो ही घटने वाली हर दुर्घटना के जिम्मेदार हैँ। ग़लत और अन्याय के खिलाफ बोलने या आवाज़ उठाने के लिए बस सत्य कि ज़रूरत होती है। और सत्य को परखने के लिए भी तमाम साधन मौजूद होते गईं। पर इन सब से परे आँख पर पट्टी कान में रुई और मुहं पर ताला लगाकर बैठ जाना उन अंधभक्तों कि फ़ितरत बन गई है। सिर्फ़ एक व्यक्ति को शीर्ष पर रखने कि चाह ने 140 करोड़ देशवासियों को न्यूनतम स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है।
बिहार के एक इलाके जमहूई में बीती शाम एक ऐसे घटना हुई जिसने पूरे देश को शर्मसार कर दिया। लेकिन कमाल ये है कि सत्ता कि तरफ से कोई भी संवेदना सन्देश या आश्वासन नहीं आया.... क्योंकि वो एक आम लड़की थी। नेता या मंत्री कि बेटी नहीं....
एक 16 वर्षीय लड़की अपने एक दोस्त के साथ scooty से ट्यूशन पढ़ कर लौट रही थी। रस्ते में चार पांच नवयुवकों ने उन्हें रोका और पूछताछ करने लगे। लड़की माफ़ी मांगते हुए कहने लगी कि जाने दो भईया हम ट्यूशन से घर जा रहे। पर उन दरिंदों पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने दोनों के साथ बदसलुकी की और लड़की को गंदे तरीके से पकड़कर खिंच कर बत्तमीजी की। लड़की अपनी इज्जत बचाने की कोशिश करती रही। उसके साथ का लड़का भी हिम्मत दिखाकर लड़की को बचाता रहा । किसी तरह दोनों वहां से बचकर भागने में सफल हुए । पर इस घटना का वीडियो वायरल हो गया ।
जहाँ जहाँ सत्ता का वर्चस्व ज़्यादा है वहाँ वहाँ इस तरह के लोग दबंगई करने लगे हैँ। क्योंकि उन्हें पता है क्योंकि क़ानूनी रूप से ग़लत होते हुए भी उनकी सरंक्षक सत्ता है। अगर वो ख़ुद को सत्ता समर्थक बताते हुए कुछ अन्यथा कर रहे तो उनको कोई छू नहीं सकता।
शर्म और बेइंतहाई वहशीपन की इस बढ़ती मानसिकता के साथ ये सरकार ख़ुद को जनता का सरपरस्त बताती है। कोई जवाबदेही नहीं,कोई जिम्मेदारी नहीं,कोई सुनवाई नहीं,कोई न्यायिक प्रक्रिया नहीं.....
घिन आती है ऐसी भक्ति की पराकाष्ठा देखकर... किसी अपने के साथ ये सब नहीं हो रहा इसलिए सत्ता का हर निर्णय बढियां है। बेखौफ घूमते सत्ता समर्थक अब वहशी बन चुके हैं । उनके लिए किसी को भी कुचल देना मामूली बात हो गई है और सवाल तो उस सत्ता से है । जिसने सविंधान कीशपथ लेकर देश की जनता के लिए काम करने का वादा किया ....पर वो मदमस्त है सिर्फ उन चंद अंधभक्तों की वजह से जो उसकी दहशतगर्दी बनाये रखने में साथ दे रहे ......।
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