प्रेम और मिलन


प्रेम और मिलन 

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अगर किसी से प्रेम हो जाये 

तो उसे पाने कि ज़िद ना करो

हर प्रेम मिलन में नहीं बदलता 

ये विश्वास अपने मन में धरो 

बस उसके होने कि ख़ुशी जो 

मन में बसी है उसे महसूस करो 

उसके करीब ना होने से जो 

खालीपन है उसकी यादों से भरो

कुछ प्रेम जीवन में हमारी कठोरता 

को पिघलाने के लिये ही आते हैँ 

हम थोड़ा नर्म और सुन्दर बन जायें 

इसलिए उस स्पर्श का अहसास हरो 

धन्यवाद है उस भावना का जिसने 

कोमलता को मन का हिस्सा बनाया 

दूरी बनाओं सख़्ती से और बेवज़ह की 

तनातनी,दम्भ से डरो...। 

                     

                    ~ जया सिंह ~

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