ज़ेनजी की उम्दा पहल
ज़ेनजी की उम्दा पहल :
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और भागो विकास के पीछे.... दौड़ते दौड़ते थकोगे नहीं क्या... आख़िर क्या सोचकर पुरानी सब चीज़ छोड़कर नए को अपनाने लगे... क्या नए से सिर्फ़ फायदा ही फायदा मिला तुम्हें....ऐसे बहुत से सवाल आज के अंधे विकास को देखकर खड़े हो रहे हैँ। जिनका जवाब है पर उसे स्वीकारने में बहुत से लोगों को शर्म आ रही है।
लेकिन ये ज़ेनजी भई..... ये तो गज़ब ही है। शुरू में मुझे भी लगता था कि ये लापरवाह हैँ ख़ुद में जीते है इन्हें जमाने समाज कि कोई परवाह नहीं, भविष्य कि कोई चिंता नहीं वगैरह बहुत से मसले.... पर ज़ब से हिंदुस्तान में ज़ेनजी ने आंदोलन किया तब से इस group की समझ, मुझे समझ आयी।
हमारी पीढ़ी ने दुनिया जमाने कि परवाह करके क्या ही जी लिया। बस चार लोग क्या कहेंगे यही सोचते रहे। कल का पता नहीं कि आज सो रहे कल सुबह उठेंगे या नहीं ये भी पता नहीं फ़िर भी भविष्य कि चिंता में घुटते रहना। बहुत से ऐसे काम जो हमें पसंद नहीं बस सामाजिक हैँ इसलिए करना। बिना वजह के पैच्चिसों तरह के आयोजनों में अपनी जमा पूंजी खत्म कर देना... जबकि उसी में मीन मेख निकालने के लिए बहुत से लोग आते हैँ।
आज जो ज़ेनजी कदम उठा रहे वो सच में काबिले तारीफ है। वो अब smart phone से normal phone पर switch कर रहे हैँ। इसके लिए वो तीन चार reason दे रहे हैँ।
1. Unwanted notifications की sound - अधिकतर समय बिना ज़रूरत के notification की पिंग पिंग से परेशान हो जाते हैँ। ये attention divert करता है।
2. AI picture के बदले grainy photos - आजकल AI ने ऐसी pics बनानी शुरू कर दी है की उसमें originality खत्म हो गई हैँ। जबकि normal camera से simple click की गई फोटो ज़्यादा natural लगती है।
3. Mental health - smart phone दिमाग़ को बहुत ज़्यादा व्यस्त रखने में कामयाब हो रहा है। इधर उधर की तमाम चीज़ेँ मिलती और दिखती है। बस उसी में उलझें रहो।
4. Time wastage - बहुत सा समय phone पर scrolling में ही ख़त्म हो जाता है। जरूरी नहीं की वह content imp हो पर दिख गया इसलिए चल रहा होता है। बस यही समय बिना मतलब की चीज़ों में गुजर जाता है।
ये नए ज़ेनजी आज को सुकूँ से जीने की कोशिश करते हैँ। सेहत के लिए gym जाना पसंद करते हैँ। खाने पीने में हमारी पीढ़ी की तरह लापरवाह नहीं है। हफ्ते में एक cheat day मनाते हैँ जिस दिन अपना सब पसंदीदा खाना खाते हैँ। चार लोग क्या कहेंगे ये ना सुनना पड़े इसलिए ख़ुद को isolated रखते हैँ। उनके हिसाब से अपनी जिन्दगी के मसले ज़्यादा imp हैँ। ख़ुद के साथ जीने को ज़्यादा महत्व देते हैँ। कोई दूसरा अगर troll करें अपशब्द कहे तो उसे दिल पर नहीं लेते... क्योंकि उनका मानना ये है की ये सामने वाली की सोच है। हमारी नहीं... इसलिए हम जैसे हैँ जानते हैँ।
आज पुरानी पीढ़ी पूरी तरह phone की addict हो चुकी है। Reels,meme facebook, you tube ये सब उनकी जिन्दगी का हिस्सा बन गए हैँ। तब अगर नई पीढ़ी को phone बुरा लगने लगा है तो ये एक अच्छा sign है। क्योंकि वो ख़ुद को पहले चुन रहे बाकी सब कुछ बाद में.....।
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