जरूरतों का मकड़जाल
जरूरतों का मकड़जाल :
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इसका सत्य उन युवाओं से पूछिए जिन्होंने ने सिर्फ़ एक दिन के लिए ही EMI मिस कर दी...? इसका नुकसान सामान्य सोच से ज़्यादा है।
जो छोटी सी देरी के तौर पर शुरू तो होता है, पर वह जल्दी ही इंटरेस्ट, पेनल्टी और टैक्स के ज़रिए एक बड़ा नुकसान बन जाता है। और ज़्यादातर कर्ज़ लेने वालों को यह नुकसान होने के बाद पता चलता है।
जब हमारे हाथ में खर्च करने की आज़ादी कार्ड के रूप में होती है तब हम उसके बाद के प्रभाव उस समय नहीं सोचते। बाद की बाद में देखेंगे ये सोचकर तात्कालिक इच्छा पूरी कर लेते हैं और शायद बाद में हम ही भूल जाते हैं।
फाइनेंशियल शांति समय पर पेमेंट करने और सोच-समझकर फैसले लेने से मिलती है। आजकल की भागदौड़ भरी और व्यस्त जिंदगी में अगर जरूरतें जरूरी है तो ये भी जरूरी है कि जरूरत पूरी करने का माध्यम सही चुना जाए। बैंक की आपके लिए पेनल्टी प्लान करने से पहले अपने कैशफ्लो की प्लानिंग कर लेना उचित होता है।
परंतु आज के GENZ की समस्या नॉकरी के स्थायित्व से जुड़ी है कभी भी उनकी नॉकरी चली जाती है। और वह बैंकों के EMI कर्ज के मकड़ जाल में फंस अपनी जिंदगी तबाह कर बैठते हैं। इसलिए जितना जरूरी है कि अपनी प्राथमिक जरूरतों को समझा जाये उतना ही ज्यादा जरूरी है कि जरूरतें कैसे पूरी होंगी उसके लिए उचित रास्ता बनाया जाए वो रास्ता जो सुकून से जुड़ा हुआ हो।
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