प्राचीन वेद -ज्ञान का अपरिमित संसार

प्राचीन वेद - ज्ञान का अपरिमित संसार : 

••••••••••••••••••••••••••••••••••

हम सब के जीवन में धर्म की एक स्थिर जगह है। हम जो भी जिंदगी जी रहे हो उसमें धर्म को सतत लेकर आगे बढ़ते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में भी कदम कदम पर धर्म से जुड़े संस्कार संस्कृति और नीतिगत नियम हमें जीवन का सही तरीका बताते हैं। जन्म, विवाह, मृत्यु आदि जो जीवन हिस्सा है उनमें किस तरह की नीतियों का पालन करना है ये धर्म सिखाता है और इसी धर्म को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। हमारे चारों वेद - ऋग्वेद, सामवेद, अथर्वेद,यजुर्वेद। इसमें वो सारा सार लिखा है जिससे जीवन धर्मानुकूल जीते हुए उचित आचरण के साथ बिताया जा सकता है। 

तो आइए बहुत ही सरल भाषा और अर्थ के साथ इस चारों वेदों का संक्षिप्त विवरण समझते हैं और जानते हैं कि इस चारों वेदों में किस तरह की बातों का उल्लेख है। ये वेद किस तरह हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। हम किस तरह उनकी पालना करके अपने जीवन में बेहतरी ल सकते हैं।

ऋग्वेद, सामवेद, अथर्वेद, यजुर्वेद ये सभी सनातन धर्म के सबसे प्राचीन उपलब्ध ग्रंथों में से माने जाते हैं। इतिहासकार इसे वैदिक संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर के रूप में स्वीकार करते हैं। हिंदी यूरोपिय भाषा का सबसे प्राचीन ग्रंथ होने के नाते इनकी मान्यता आज भी समाज में बनी हुई हैं। इनके अनुसार आचरण को जीवन का सही संचालन समझा जाता है। 3800000BC से 4200000BC के बीच इनका काल माना जाता है। उस समय के ऋषियों जिन्हें होत्र कहा जाता था। उन्होंने इसे रचित किया और पढ़कर सबको इससे अवगत कराया। 

लेख के अगले चार अंकों में एक एक करके हरेक वेद का संक्षिप्त सार सामान्य अर्थ के साथ समझने का प्रयास करेंगे...क्योंकि जानकारी कभी भी व्यर्थ नहीं जाती। ज्ञान का संसार अपरिमित है। इसलिए चाहे जो भी विषय हो थोड़ी बहुत जानकारी रखना बेहतर ही होता है.....🙏

◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆

Comments