Relationship Truths (Part 2)
Relationship Truths : भाग -2
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इसके अलावा भी कुछ और महत्वपूर्ण टर्म्स हैं जो एक अनहेल्दी और टॉक्सिक रिश्ते को समझने के लिए ज़रूरी हैं .........
A. Gas lighting ( गैसलाइटिंग) - गैसलाइटिंग का असली मतलब है किसी इंसान के अंदर सेल्फ डाउट भर देना। आपका पार्टनर आपके साथ मनोवैज्ञानिक तौर पर खेलता है और आपको अपनी ही सोच, यादों, खयालों, फैसलों पर संदेह करने को मजबूर कर देता है। जिन लोगों के साथ गैसलाइटिंग होती है वो हमेशा कंफ्यूज, एंग्जाइटी से भरे हुए, घबराए हुए रहते हैं।
Gaslighting टर्म 1938 के एक प्ले और उसी पर बनी 1944 की एक फिल्म 'गैसलाइट' से आया है। इस प्ले में पति अपनी पत्नी के पीठ पीछे लाइट को जलाता और बुझाता है और उसे बताता है कि यह सिर्फ़ उसका भ्रम है। लगातार ऐसा करके वह उसे यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि उसकी दिमागी हालत खराब है।
B. Love bombing (लवबॉम्बिंग) - रिश्ते की शुरुआत में ही अचानक से आपको प्यार से लबरेज़ कर देना। आपको बहुत ज्यादा प्यार दिखाया जाएगा, ख़ुद ही सॉरी बोलकर आपको दो मिनटों में मना लेगा, हर चीज में वो आपको सिर्फ और सिर्फ अच्छा कॉम्प्लीमेंट देगा। आपको फूल भेजेगा, उपहार भेजेगा। आपको ऐसा लगने लगेगा कि जैसे उस इंसान से अच्छा इस दुनिया में कोई नहीं है, वो परफेक्ट मैच है और वो आपकी जिंदगी में पहले क्यों नहीं आया या आई।
कुछ मुख्य वाक्यांश जिनका वे उपयोग कर सकते हैं:
"मैं तुमसे जुड़ी हर चीज से प्यार करता हूं।"
"मैं आप जैसे परिपूर्ण व्यक्ति से कभी नहीं मिला।"
"आप एकमात्र व्यक्ति हैं जिसके साथ मैं समय बिताना चाहता हूँ।"
"हम एक साथ रहने के लिए पैदा हुए थे।"
"यह किस्मत है कि हम मिले।"
"मुझे इतने अच्छे से आज तक किसी ने नहीं समझा ।"
"हम जीवन साथी हैं।
लव बॉम्बिंग शुरू में अच्छी लग सकती है लेकिन अक्सर ये प्यार मैनिपुलेशन (Manipulation) के साथ किया गया होता है। शुरू में अपने self respect को वो बिल्कुल किनारे करके रखते हैं और अगर आप उन्हें slow होने के लिए कहने की कोशिश करते हैं, तो वे परेशान हो जाते हैं। और बाद में फिर वो आपकी जिंदगी को कंट्रोल करने लगते हैं। आप उन्हें कितना भी समय और उपलब्धता दें, उन्हें यह कभी पर्याप्त नहीं लगता। वे अकेले रहना बर्दाश्त नहीं कर सकते। आप उनके हर मैसेज का उत्तर तुरंत देने के लिए बाध्य महसूस करते हैं क्योंकि उन्होंने आपको वह महंगा आईफोन उपहार में दिया है। जब उनके मुताबिक चीजें नहीं होती है तो वो बदतमीजी और नीचेपन पर आ जाते हैं। जैसे ही आप उनके व्यवहार की वजह से उनसे दूर होने का प्रयत्न करते हैं वे फिर प्यार की वर्षा कर देते हैं।
C Bread crumbing (ब्रेडक्रंबिंग) - ब्रेडक्रंबिंग मतलब किसी को उतना ही अटेंशन/प्रिफरेंस देना जितने में वो आपको छोड़ के न जाए, इंगेज बनी/बना रहे लेकिन रिश्ते का स्वरूप क्या है, भविष्य क्या है, को लेकर कभी आश्वस्त न हो सके। यानी ऐसी situation create करके रखना कि सामने वाला उसपर अटका भी रहे और उसके लिए commitment भी न करना पड़े।
यह रिलेशनशिप में एक ऐसा टर्म है, जहां एक व्यक्ति सिर्फ "दिमाग" के साथ मौजूद होता है तो दूसरा इंसान "दिल" से चीजें निभाता है।
इसमें ब्रेडक्रंबर्स का तो कुछ नहीं जाता, लेकिन सामने वाले के मेंटल हेल्थ पर असर पड़ सकता है। काफी लंबे टाइम के बाद उसे समझ में आता है कि जैसा वो समझता था वैसा तो कुछ है ही नहीं। इसी के चलते वह इमोशनली काफी हर्ट हो जाता है।
कैसे पहचानें कि आप ब्रेडक्रंबिंग टर्म में फंसे हुए हैं।
Mixed signal देना- अगर आपकी लाइफ में कोई ऐसा इंसान है जो आपको हमेशा मिक्सड सिग्नल देता है यानी वह आपको अपने हावभाव, इशारों या फिर घुमा फिराकर बातों ही बातों में कभी-कभी वह ऐसा महसूस करवाता है कि उसके मन में भी आपके लिए फीलिंग्स हैं तो दूसरे समय इस बात से इंकार भी करता रहता है। इससे आपके मन में हमेशा कन्फ्यूजन बनी रहती है।
अपने हिसाब से बात करता है- ऐसा इंसान जो आपसे अपने समय के हिसाब से बात करता है। जब आप कॉल या मैसेज करते हैं तो वह उपलब्ध नहीं होता या तो उसे इग्नोर कर देता है या फिर जब उसका मन हो वह तब रिप्लाई करता है।
ब्रेडक्रंबिंग में फंसा इंसान ये समझ नहीं पाता है कि सामने वाला सिर्फ उसे एक ऑप्शन की तरह देखता है। दरअसल इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि वो कब आपको अटेंशन दे रहा है, क्योंकि ऐसे लोग आपको तब थोड़ी सी अटेंशन देना शुरू करते हैं, जब उन्हें लगता है कि अब आपका झुकाव उसकी तरफ कम हो रहा है। ऐसे लोग खुलकर कमिटमेंट नहीं देते हैं और आप भी अपना समय और इमोशन गलत जगह इन्वेस्ट करते रहते हैं। ऊपर बताए छोटे-छोटे रेड सिग्नल्स को पहचानकर आप ब्रेडक्रंबिंग से बच सकते हैं।
D. Trauma Bonding ( ट्रॉमाबॉन्डिंग) - ट्रॉमा बॉन्डिंग वह लगाव है जो एक दुर्व्यवहार सहने वाला व्यक्ति अपने दुर्व्यवहार करने वाले के लिए महसूस करता है और उसे छोड़ नहीं पाता। इसमें टॉक्सिसिटी के तमाम रूप शामिल होते हैं लवबॉम्बिंग, अब्यूज, मैनिपुलेशन, गैसलाइटिंग etc। अंतिम स्तर तक आते आते एब्यूजर दूसरे व्यक्ति को पूरी तरह स्वयं पर निर्भर बना लेता है। हर अब्यूज के बाद उन्हें अत्यधिक प्यार देता है, उनसे कभी भी दुर्व्यवहार न दोहराने का वादा करता है, अपनी रोती हुई फोटुएं भेजता है, नस काटकर या स्वयं को कोई और नुकसान पहुंचाकर पीड़ित का विश्वास बार-बार हासिल करता है। पीड़ित को उससे सहानुभूति होने लगती है कि उसने अगर इसे छोड़ा तो यह ज़िंदा नहीं रह पायेगा, कुछ कर करा लेगा, या फिर एक न एक दिन मैं इसे सुधार लूंगी/लूंगा और फिर जीवन खुशमय हो जायेगा। दुबारा पैचअप के बाद फिर वही हरकतें (एब्यूज) दोहराई जाने लगती है। इस तरह यह एक एंडलेस चक्र की भांति हो जाता है। अक्सर यह एक नॉर्ससिस्ट और एक empath के बीच स्थापित होता है।
ट्रॉमा बॉन्डिंग किसी भी रिलेशनशिप में बेहद खतरनाक स्थिति होती है। क्योंकि victims का rescue बहुत मुश्किल हो जाता है वह अपने abuser के प्रति कुछ भी गलत होते हुए नहीं देख पाता। उसका बाहर निकलना तभी संभव है जब विक्टिम खुद जागरूक होकर एब्यूजर की बातों पर बिलीव करना बंद करे, और किसी विश्वस्त से मदद मांगे।
E. Ghosting ( घोस्टिंग)– किसी से कुछ दिन तक अच्छे से बात करना और फिर एकदम ही कट ऑफ कर देना/ हर जगह से ब्लॉक कर देना। ऐसा करते समय उस इंसान को कोई वॉर्निंग या फिर किसी तरह का कोई एक्सप्लेनेशन नहीं दिया जाता है। जो इंसान कट ऑफ होता है वो हमेशा इसके बारे में सोचता रह जाता है कि हुआ क्या...!
उपरोक्त सभी पॉइंट्स से रिश्ते की सही समझ और परख महसूस की जा सकती है।
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