खयालों को ख़याल रहने दें
ख्यालों को ख़याल रहने दें :
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कुछ खयालों को बस ख्याल रहने दें
उनके हकीकत बन जाने की जिद को
समय की धारा के अनुकूल बहने दें
कुछ बातें अपने आप पूरी हो जाती हैं
उनके लिए अथक प्रयास नहीं लगते
परिस्थितियों को वक्त की रफ्तार के संग
तालमेल बनाकर कोई कहानी कहने दे
मजबूती यूँ ही नहीं आ जाती कहीं भी
संयम व धैर्य से उसमें परिपक्वता आती है
अक्सर मुलायमियत कमज़ोर बनाती है
थोड़ा तो व्यक्तित्व को प्रतिकूलता सहने दें
ऊपरी सजावटें सौंदर्य को कभी भी चिरस्थाई
नहीं बनाती ... ये तो बस आवरण होता है
असलियत प्रत्यक्ष आएगी जब व्यवहारिक
आँच में मुखौटों का मोम पिघल कर ढहने दें
जिंदगी के मौसम हर बार नया अनुभव देंगे
बस उसे तापमान जे अनुकूल वस्त्र पहने दें।
~ जया सिंह ~
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