चाहिए से नहीं चाहिए का सफ़र
चाहिए से नहीं चाहिए का सफ़र
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आज दिल ने मुझे एक ताना दिया
हर वक्त सबकी बनकर रहने वाली
चल ढूंढ कर ला.....तेरा कोई है कहाँ
क्या कोई समझ पायेगा कि बहुत
ही मुश्किल होता है वो सफ़र जो
चाहिए से, ना चाहिए तक तय होता है
हमने बस थोड़ी यही कोशिश की हमेशा
कि दिल ना ही टूटे किसी का...
बस यही तो कारण रहा कि हम तो
सबके हो गए पर कोई हमारा ना हुआ
दुनिया हमारी जिंदगी में रोज नए चेहरे देती है
हर चेहरा हमारे चेहरे से उलझनों को पढ़ ले
ये ज़रूरी नहीं, क्योंकि तकलीफ हर बार
चेहरों पर नहीं लिखी होती....और
मनों को पढ़ ले हर कोई इतना माहिर नहीं
शायद इसीलिए हमने चाहिए को
ना चाहिए में बदल दिया....
और सच बतायें, इस बदलाव से सुकूँ पा लिया।
~ जया सिंह ~
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