जीने का सलीका
जीने का सलीका :
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चालांकिया धरी रह जाएंगी सारी जब चालू होगा कर्मों का हिसाब मिलना सब नेकियों के हिसाब की खुदा ने जो शुरू कर दी, हर किसी के कर्म की तुलना जो अंदर से हो, वही महत्वपूर्ण है बाहर का दिखावा क्या..वो तो मुखौटा है साफ़ मन की भावना रखकर जो संबंद्ध निर्वहन करें यही है आगे चलना पता नहीं कौन सा गणित चलता है ऊपर वाले के राज में ये समझ से परे है उस न्याय के चलते कोशिश होये जीवन में कुकर्मों की निरंतरता से निकलना आज गुजर रहा उसकी फ़िक्र न करो कल जो आने वाला है उसे बेहतर बनाओ आज ख़ुदाई ढर्रे से जी लिए तो जो लड़खड़ाए तब आसान होगा संभलना तिगड़में आजमाना सफल होने को इस जुगाड़ को ख़ुदा हमसे बेहतर समझता है सलीके की जो आदत हो गई तो छोड़ सकोगे चालाकियों की चालों पर पलना...!
~ जया सिंह ~
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