स्थितियों को थोड़ा उलट कर देखा जाए
स्थितियों को थोड़ा उलट कर देखा जाए !! *****************************
वह गाँव का आख़िरी मर्द था।
गाँव बहुत ही पुरातनपंथी और रूढ़िवादी था...
यहाँ लड़कों को जन्म के बाद ही मार दिया जाता था..
कई बार तो उन्हें गर्भ में ही मिटा दिया जाता था...
लड़कों का पालन-पोषण व्यर्थ समझा जाता था...
उन्हें न शिक्षित किया जाता, न कोई कौशल सिखाया जाता...
बस घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था...
रसोई और सफ़ाई उनके हिस्से का संसार था...
शास्त्रों में लिखा था कि -----
“पुरुष केवल स्त्री के लिए ही बना है, और उसका जीवन स्त्री की सेवा और उसके जीवन को समर्पित है। ”
पुरुष सदैव ढका हुआ रहना चाहिए.....
क्योंकि उसके शरीर का कोई भी अंग स्त्री को उत्तेजित कर सकता है।
ये भी सत्य माना जा सकता है कि “पुरुष का खुलापन स्त्री को कामुक बना देता है।
लेकिन सदियों से चली आ रही इन परंपराओं ने समस्त गाँव के पुरुषों का दम घोंट दिया था। वे इस तरह का जीवन जीते और सहते भीतर से टूट चुके थे।
वे स्त्रियों को मार तो नहीं सकते थे....
इसलिए उन्होंने स्वयं को मिटाने का निर्णय लिया।
एक रात उन्होंने अग्निकुंड जलाया
और सभी मिलकर उसमें कूद पड़े....
अपनी बेबसी, अपमान और कुढ़न को आग में सौंपते हुए।
पर संयोगवश....
एक पुरुष को स्त्रियों ने बचा लिया। वह आने वाले समय की आहट के कारण भय से काँप उठा.....
अब यक्ष प्रश्न ये था कि.....
उसे “महापुरुष” बनाया जाएगा ? या “वेश्या पुरुष” ?
एक काल्पनिक स्थिति जो कि शायद हर स्त्री के दिलो दिमाग में अमूमन चलती होगी कि उसके अस्तित्व को चुनौती देने के लिए पुरुषत्व किस हद तक उसे कुचलने के लिए आमादा होता है। तो क्या हो अगर कुछ ऐसा हो जाये.....!!
Cpd
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