स्वाद की गाथा

 स्वाद की गाथा :  

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क्या कभी किसी ने ये सोचा कि....

वो कौन पहला व्यक्ति रहा होगा,

जिसने सोचा होगा कि

जलेबी पर रबड़ी डालकर खाई जाए 

तो स्वाद का और मज़ा आएगा

और समोसा खाली यूँ ही खाने के बजाए

उस पर छोले डाले जाएं तो उनका 

स्वाद और भी बढ़ जाएगा...


या किसने पहली बार ये जादू खोजा होगा

कि गरमा-गरम गुलाब जामुन

एकदम ठंडी आइसक्रीम के साथ खाया जाए...

एकदम विपरीत संगम फिर भी 

स्वाद भरपूर और मजेदार...

बड़ा बनाकर किसने ये सोचा कि 

उसे दही में डुबो कर खाया जाए

उस पर खट्टी मीठी इमली की चटनी

हरी चटनी और मसाले....


रोटी की जगह गोल गोल बाटी बनाई 

और उसके साथ दाल खाने की 

परंपरा शुरू की होगी....!


किसने बताया होगा

कि चंपारण मटन मिट्टी के बर्तन में 

पककर और ज्यादा स्वादिष्ट बनेगा और

लिट्टी के साथ ही बढ़िया लगता है। 


कढ़ी के साथ कचौड़ी खाने का

किसी ने तो सोचा होगा ना..

और कौन होगा वो महानायक

जिसने सर्वप्रथम रसमलाई को एकदम

 ठंडा करके खाया होगा... ?


हमने हमेशा शिक्षाविदों, कलाकारों, 

वैज्ञानिकों की तारीफें की है....

पर शायद हम भूल गए

उन लोगों को,

जिन्होंने स्वाद से संबंधित ये

अनोखे अविष्कार किये जो आज

हर किसी की जबान पर इस तरह 

बैठे हैं कि लोग इसे खा कर अपनी

आत्मा तृप्त हुए महसूस करते हैं।


मतलब कुछ तो बात है इन खोजों में 

जिन्होंने इन कॉम्बिनेशन को 

चिरस्थाई बनाकर अमर कर दिया...😋😋


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