ये है न्यू इंडिया
ये है न्यू इंडिया :
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कहीं पर यह पोस्ट दिखी तो निगाह ठहर गयी....
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सदर कोतवाली की घटना बताई जाती है। कक्षा 11 में पढ़ने वाले किशोरवय लड़के को पिता ने किसी बात पर डांट डपट दिया।
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बेटे को इतना बुरा लगा कि वह कोतवाली पहुंच गया। पिता पर बेदर्दी से पिटाई करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दे दी। पुलिस ने पिता को तलब कर लिया।
पिता ने पूरी बात बताई। बेटे को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं था। पिता पर कार्रवाई की मांग कर रहा था। बार-बार अपने मामा को कोतवाली बुलाने की भी मांग करता रहा।
अंततः पिता बेटे के पैरों पर गिर पड़ा और माफी मांगी। उसके बाद बेटा माना और पटाक्षेप हुआ।
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जो गुस्सा, जो ईगो, जो निष्ठुरता, हुनक, सनक, परायापन..
और परपीड़ा के सुख का जो ज्वार समाज मे फैलाया गया है, वह सिर्फ दूसरों पर नही बरसेगा। ये लौटकर हमारे घरों में इसी तरह दस्तक देने वाला है।
इसलिए अब सबको तैयार रहना है क्योंकि ये न्यू इंडिया है।
जो अपने ही घर मे घुसकर मारेगा लेकिन हमें नहीं समझ आएगा कि आखिर हमारी गलती क्या थी और कितनी बड़ी थी।
बधाई हो सब हिंदुस्तानियों को, एक विषाक्त, भावनाहीन, अभद्र, उपद्रवी, निष्ठुर, अशिष्ट समाज बनाने के लिए। क्योंकि जब विकास की अंधी दौड़ में ये समझना भूल जाएं कि व्यवस्था से ही जिंदगी बनती है। तो ये परिणाम प्रत्यक्ष आना ही था।
चाहे सरकार की व्यवस्था हो , सामाजिक व्यवस्था हो या पारिवारिक। सब में हमने सिर्फ़ अंधे विकास को चुना। जिसमें तनिक भी सत्यता का आभास नहीं खोजा। बस चल पड़े उस राह पर जहां देश समाज से लेकर परिवार भी प्रभावित होता दिख रहा। पर अब हम कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि आधे तो हम दलदल में फंस ही चुके हैं। रहा सहा भविष्य में डूब जाएंगे।
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