कहीं - अनकही

कही - अनकही :

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कुछ कही व कुछ अनकही रह गयी

फ़िर भी कहीं राब्ता, पूरी तरह नहीं टूटा

दूरियाँ बढ़ गई और वक्त बदल गया

फिर भी हाथ मिलाने का मोह नहीं छूटा

मिले नहीं तो क्या, नाम तो जुड़ा है

एक अहसास बीच में मजबूती से खड़ा है

वो लम्हे जो बिना बिताए गुजर गए

उनको छूकर गुजरने का सुख वक्त ने लूटा

तुम अपनी जगह कायम रहे और

हम अपनी जगह के कायम होकर रह गए

बस जगहें अलग अलग थी शायद

फ़िर भी दूरी के संग रहा अपना रिश्ता अनूठा

क्या था जो वक्त ने दबा कर रखा था

वो भी बस सही वक्त का इंतेज़ार कर रहा था

जब वो जोड़ सके जो बेवजह ही टूटा

नहीं चाहता कोई कि दूरियां दिलों में हो जाएं

मधुर से सम्बंध प्यार में बंधे रहने के 

बजाय निराशा और अनमनेपन में खो जाए

बस इसीलिए जुड़ाव बनाये रखना

और रिश्तों में कुछ ना कुछ हरकतें चलाये रखना। 

              ~ जया सिंह ~

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