खुशियों के मौकें बनाओ

 खुशियों के मौके बनाओ :

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आजकल हम सब ने महसूस किया है कि जिंदगी तमाम उलझनों और जिम्मेदारियों से जूझते हुए चलती है। खुशियां ढूंढ कर बनानी पड़ती है। नहीं तो वो लम्हें पता नहीं कब यूँ ही गुजर जाते हैं। अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और क्रियाकलापों के बीच हम इतने खो जाते हैं कि अपने आसपास की खुशियों को भी नजरअंदाज कर देते हैं।

हिंदुस्तानी जीवनशैली में मूलतः तीज त्यौहार इस तरह मनाए जाते हैं कि वो उत्सव की तरह लगते हैं। खाना पीना मौज मस्ती रोशनी रंगीनियत, उल्लास वगैरह। हिंदुस्तान में बहुत सी जातियां रहती हैं सबके अलग अलग रीति रिवाज हैं अलग उत्सव है। और अलग तरह का सेलिब्रेशन है। इस तरह अगर देखें तो ऐसे बहुत से मौके हैं जिन्हें हम खुशी मनाने के लिए उनके साथ हो सकते हैं। पर ऐसा नहीं है....

अभी हाल ही में असम ,मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बजरंग दल द्वारा क्रिसमस के आयोजन के लिए की गई सजावट को तोड़ फोड़ करके हंगामा किया गया। मारपीट की गई और पूरा आयोजन ध्वस्त कर दिया गया। आखिर ये सब क्या है....क्या हिंदुस्तान में कभी किसी ने किसी मुस्लिम या ईसाई को दिवाली या होली पर मिठाई खाते नहीं देखा। क्या उन्हें रंग या रोशनी से परेशान होते देखा। 

मैं किसी विशेष जाति या धर्म का समर्थन नहीं कर रही। बस ये कहना चाहती हूं। कि इस भागदौड़ और व्यस्तता वाली जिंदगी में अगर कोई कहीं कभी भी मौका मिले उसे पकड़ लेना चाहिए। क्रिसमस ईसाइयों के त्यौहार है। पर इस मौके की रौशनी रंग हर किसी को आकृष्ट करते हैं। ऐसे में क्या चला जायेगा अगर कोई दूसरे धर्म का इस आयोजन में शामिल हो जाये। यहाँ धर्म अपनाने की वात कत्तई नहीं हो रही। बस उनकी खुशियों में खुद को शामिल करने की बात हो रही। इतनी उम्र होने के बाद भी आज भी मुझे सांता अच्छे लगते हैं। उनके बारे में सोचने पर लगता है कि काश उनकी पोटली में मेरे लिए भी कोई तोहफा होगा। ये मन के अंदर का कहीं छुपा हुआ बच्चा ही तो है जो खुशियां ढूंढ रहा। मौज मस्ती के साथ कुछ पल हंसी खुशी गुजारना चाहता है। 

क्या ईद पर अपने किसी परिचित के यहां सेवइयां खाने से कोई उसी धर्म का हो जाएगा...या क्रिसमस का केक खा कर कोई ईसाई हो जाएगा। ये सब रूढ़िवादीता है। जिसे आजकल ओढ़ कर चलने का चल बन गया है।आज जरूरत है कि किसी भी धर्म के खास मौकों पर बस मनोरंजन के तौर पर अपनी जिंदगी में शामिल किया जाए। ताकि ख़ुश होने के मौके जल्दी जल्दी मिल सके। 

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