हवाई महल
हवाई महल :
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हवाई महल बनाना अर्थात ऊंचा उड़ना कहा जाता है। ये हर बार गलत नहीं होता। क्योंकि कहते है ना कि ऊंचा वही जाते हैं जिनके हौसलों में उड़ान होती है। सोचने की कोई सीमा नहीं होती। फिर भी अमूमन इंसान वही सोचता है जो उसकी क्षमता में होता है। बस यही पर थोड़ा सा परिवर्तन लाने की जरूरत है। जो पहुंच में है उसके बारे में क्या सोचना। क्योंकि उसे तो कभी भी हांसिल किया जा सकता है। पर अगर वह सोचा जा रहा जो पहुंच से दूर है तो उसके प्रति आकर्षण बढ़ेगा और वो आकर्षक और अधिक प्रयास के लिए उकसाएगा।
बस एक यही मंत्र जीवन की दशा दिशा दोनों बदल सकता है। हमें करना बस ये है कि अगर हमारा मन हमें ऊंचा उड़ने और सोचने को प्रोत्साहित कर रहा है तो बुद्धि को उस हवाई महल के नीचे की नींव तैयार करने के लिए प्रयास करना चाहिए। क्योंकि नींव अगर सॉलिड बन गयी तो ऊपर के माले खड़े करना आसान हो सकता है। नींव तैयार करना ही सबसे प्राथमिक और आवश्यक काम है।
प्रयास भी वही असर दिखाते हैं जिनके लिए जमीन मजबूत होती है। जैसे कि एक सामान्य से उदाहरण से इसे समझते हैं। कोई नवयुवा सिविल सर्विसेज में चयन होने के सपने देखता है। तो सबसे पहले उसे नींव तैयार करने के लिए लगन से अपनी पढ़ाई और तैयारी पर फोकस करना होगा।उसे उस मजबूत जमीन पर खड़ा होना होगा जिस पर उसे डगमगाने का संदेह ना हो। ख़्वाब ऊंचे नीचे या छोटे बड़े नहीं होते। बस हमारे हौसले में कमी उनको बहुत बड़ा और दूर बना देती है।
इसलिए हवाई महल बनाये जाए। पर उसके लिए सबसे पहले एक मजबूत नींव बनाये। जिस पर हमारी उम्मीदों का महल खड़ा होगा।
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