मन को खाली मत छोड़ो

 मन को खाली मत छोड़ो :

•••••••••••••••••••••••••••

हमारा ये मन भी बहुत विचित्र है। बस भागता रहता है। इसको अपनी सीमाओं का भी भान नहीं। असल में इसकी कोई सीमा ही नहीं।  पल भर में उड़ते उड़ते आपके पास से दूर किसी देश में चला जायेगा। कल्पनायें करने लगेगा। खुद को उसमें जीने देने लगेगा। 

अभी पिछले लेख में एक पंक्ति आई कि पुष्पक विमान मन की गति से चलता था। अर्थात बहुत तेज। पर ये बस रूपक अलंकार है। मन की गति तो प्रकाश की गति से भी तेज है। अर्थात मन सेकण्ड्स के भी सौवें हजारवें हिस्से में आपको विदेश की सैर करवा सकता है। आपको किसी अपने से मिलवा सकता है। कुछ ऐसा जो हांसिल करना चाहते हों वह आपको मिल गया ये आश्वास्त करवा सकता है।

पर मन का भी अजीब मसला है ये जब व्यस्त रहता है तो हमारे हिसाब से चलता है। हम जो भी कार्य इसे देते हैं । उसमें विचारों के जरिये योजनाबद्ध क्रियाशील रहता है। पर जब इसे खाली छोड़ दो तो ये कुलांचे भरने लगता है। क्योंकि तब ये आज़ाद है। इसे स्वतंत्रता मिल जाती है कि ये अगड़म बगड़म कुछ भी सोच सकता है। 

बस मुख्य मुद्दा यही है कि मन को खाली मत रखो। उसे कोई लक्ष्य देकर व्यस्त रखना होगा। अब ये व्यस्त रखने के लिए क्या क्या किया जा सकता है .......

1. किताबें पढ़ने की आदत डालनी होगी। जिससे उसकी कहानी को चलचित्र की तरह महसूस करने में मन व्यस्त रहे। 

2. अपने किसी हुनर को बाहर निकलने देना होगा। जैसे कला, संगीत, कुकिंग आदि। 

3. घर और आसपास मौजूद छोटे छोटे अवसरों को खोजकर उसमें खुद को शामिल करना होगा। 

4. अगर अकेले कुछ काम भी कर रहे हों तो कर्णप्रिय संगीत लगाकर काम किया जाए। जिससे मन उस संगीत में खोया रहेगा।

5. बीच बीच में छोटी छोटी रोड ट्रिप और घूमने का प्रोग्राम बनाते रहना चाहिए। लौटने के बाद भी बहुत समय तक मन में उस आनंद का enjoyment छलकता रहता है। 

6. मन को व्यस्त रखने का एक और तरीका है दोस्तों से मेलमिलाप। दोस्त मन लगाने की बहुत बढियाँ औषधि हैं। दोस्तों के साथ सिर्फ मौज होती है। 

7. जैसे मुझे लिखने का शौक है तो खाली वक्त में मैं कविताएं , लेख वग़ैरह लिखती हूँ। 

8. जिंदगी को एक theme पर चलाने की कोशिश करनी चाहिए। मतलब जैसे अपनी choices, style, pattern को set करके रखिये। जिससे मन उसमें रचा बसा रहता है। कुछ नया या भिन्न जिसे मन जल्दी स्वीकार ना कर पाए उसमें बहुत समय तक मन उलझा रह सकता है।

9 . सबसे जरूरी चीज, मन को खुश रखना जरूरी है। ख़ुश रखने के लिए उसे उसकी मनचाही व्यस्तता दें। 

10. अगर मन अतीत में उलझा रहता है तो उसे बेहतर वर्तमान देना चाहिए। जिससे वो पुराने में लौट लौट कर जाना छोड़ दें ।

मन को उसकी सीमाओं भी मौके मौके पर बताना जरूरी है। मतलब अगर मैं अम्बानी की तरह हवाई जहाज नहीं खरीद सकती तो उसकी इच्छा ही क्यों। फिर क्यों मैं अपने मन को उस दिशा में भगाऊँ। ये सीमाएं बंदिश के तौर पर नहीं बल्कि कोई दूसरी खुशी हांसिल करने के नाम पर उसे दिखाई जा सकती है। इसीलिए सही खतें हैं कि मन को व्यस्त रखो। वो आपको खुश रखने लगेगा।

◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆



Comments