कुछ अलग व्यक्तिव्य का धनी

कुछ अलग व्यक्तिव्य का धनी : 

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बारिश की बूंदें जब बादलों से नाता तोड़ कर नीचे की ओर बहती हैं, तो सिर्फ धरती ही नहीं भीगती, कुछ सपने भी भीगते हैं, कुछ संकल्प भी। लोगों का भीगना कोई बड़ी खबर नहीं होती, क्योंकि अमूमन भीगते लोग अखबारों में जगह नहीं बना पाते है। कुछ लोग जब जरूरत के लिए भीगते हैं, तो वो बस जोमैटो वाले, स्वीगी वाले होते है, जो बस समाज के लिए दया के पात्र होते है।

आजकल हिंदुस्तान में एक भीगता हुआ लड़का एक विचार बनता जा रहा है। एक कोशिश, एक संघर्ष,  जो बारिश के बीच भी नहीं रुक रहा, जो अपने लिए नहीं आपके लिए, परिवार के लिए, समाज और देश के लिए लड़ रहा होता है। उसके भीगे बाल, पानी से चिपकी कमीज़, और माइक के सामने टिकी आवाज़ बादलों की गड़गड़ाहट के बीच भी गरज कर कहती है कि देश बचाने के लिए बारिश आँधी तूफान सबसे लड़ना पड़ता है।

ऐसे में भीगते हुए लड़के सिर्फ गीले कपड़े नहीं पहनते, वो समाज की चुप्पियों को, उदासियों को, उम्मीदों को भी ओढ़े रहते हैं। लड़को का भीग जाना भी किसी क्रांति की शुरुआत हो सकता है। बारिश के बीच खड़ा ये लड़का सिर्फ क्रांति की मशाल नहीं जला रहा, बल्कि उम्मीद भी बाँट रहा है, हिम्मत भी और एक संदेश भी कि संघर्ष थमता नहीं, चाहे कितना भी भीग जाए। 

इस तस्वीर में जो मुस्कान है, वो बस एक मुस्कान नहीं वो सैकड़ों आँधियों से बचकर निकली हुई रोशनी है। बारिश उसे भिगो सकती है, पर बुझा नहीं सकती, आंधी उसके कदम डिगा नहीं सकती। अगली बार जब बारिश में कोई लड़का सफेद शर्ट में भीगता हुआ दिखे, माइक के सामने या बाइक के पीछे तो चारो तरफ नज़र घुमा कर देख लेना। कहीं वो राहुल तो नहीं। 

वैसे मैं बिल्कुल भी राजनीतिक नहीं हूं। कोई news Chanel नहीं देखती। क्योंकि आजकल राजनीति बेहद गन्दी हो चुकी है। परंतु राहुल को बस एक व्यक्तिव्य के आधार पर तौलती हूँ। उसने अपनी जिंदगी में बहुत उतार चढ़ाव देखे। सबको लगता है कि प्रधानमंत्रियों के परिवार में पैदा होकर उसने बहुत फायदे उठाएं है। जबकि मैं जब पीछे मुड़कर देखती हूँ। तब यही पाती हूँ कि उसने अर्जित फायदे के मुकाबले बहुत कुछ क़ीमती खोया है। वह नेता तो कत्तई नहीं है। बस वो एक अच्छा लड़का है। जो किसी को भी गले लगा लेता है। किसी भी बच्चे को कंधे पर बिठा लेता है। कोई महिला उसे छूने से हिचकती नहीं क्योंकि जानती है उसका मन साफ़ है। उससे मिलने पर लोगों को डरना नहीं पड़ता। आम आदमी के बीच वो भी उन्हीं के जैसा बन जाता है। इसलिए राहुल अलग है और जब वो भीगते हुए जब लोगों से संवाद करता है तब वो लोगों के मनों में जज्ब नमी को छूता है।

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