थक गए है हम सब

थक गए हैं हम सब :

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ये सच ही तो है यार कि

हम सब थक गए है...! 

कोई आँसू छुपाने से थक गया है

कोई वेवजह मुस्कुराने से थक गया है

कोई ख़ुश होकर थक गया है

कोई घड़ी घड़ी रोकर थक गया है

कोई रात को जागकर थक गया है

कोई सच से भागने को सोकर थक गया है

कोई भीड़ से घबराकर थक गया है

कोई तनहाइयाँ अपनाकर थक गया है

कोई थक गया कि कुछ बदलता क्यों नहीं

कोई बदलाव में सामंजस्य बिठाने से थक गया

असल में हम जो ख़ुद को थका हुआ पाते हैं

वो कुछ नए की चाह में वर्तमान गवातें हैं

असल में हम खुद को ही खोज रहे हैं

तभी इस थकान का कोई पर्याय सोच रहे हैं

जिंदगी सरल है पर हमने उसे उलझा दिया

छोटे छोटे पलों की खुशियों को झुठला दिया

असल में हम थके नहीं है बस एक ऊब से 

निकलने की जद्दोजहद से जूझ रहे हैं

खुदाई नेमतों से भरपूर जिंदगी से अबूझ रहे हैं

            ~ जया सिंह ~

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